अब धारा नहीं बहेगी

कुछ खबरें हैं जो हवा में तैर जाती हैं और पल भर में जन-जन तक पहुंचती हैं। जम्मू-कश्मीर में पिछले कुछ दिनों से जो तैयारी चल रही थी, वह जमीं से लेकर हवाओं तक में कई तरह के सवालसंदेह और अटकलें पैदा कर रही थी। हर जुबान पर था कि कुछ होने जा रहा है। आखिर में इतना बड़ा हुआ जो कइयों का कद छोटा कर गया। संसद में जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन बिल ने कई गांठे खोल डालीं तो कइयों की आंखें खोल डालीं जिन्हें पहले से नहीं पता था कि धारा 370 में क्या है, पता चलने पर दांतों तले अंगुली दबा ली। अब सारा देश एक तरफ और मुट्ठीभर दूसरी तरफ। और ये मुट्ठीभर भी सिर्फ वे हैं जो अगर विरोध नहीं करेंगे तो भी मारे जायेंगे और करेंगे तो भी। पर अपने देश में दीवानों की भी कमी नहीं है। जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल पर मतदान के समय संसद में कुछ तो ऐसे दीवाने निकले, जिन्होंने पार्टी लाइन तोड़कर अपनी आत्मा की आवाज सुनकर अपने कंठ से वे सुर निकाले, जिन्होंने इतिहास में उनका नाम दर्ज कर दिया ।दरअसल हमारी आदत हो गयी है कि देश से जुड़े मुद्दों पर भी हम एक नहीं हो सकते और महाभारत करके ही दम लेते हैं। कितना अच्छा मौका था पूरी दुनिया को दिखाने का कि हमारे देश की अखण्डता के सामने राजनीति के सारे खंड एकजुट होकर एक सुर में बोलते हैं। पर ऐसा हुआ नहीं। और यदि शासक दल ने कभी संसद में यह कह दिया कि धरती गोल है तो भी विरोधी पक्ष चिल्ला उठेगा-नहीं, धरती चौकोर है।एक बार एक लड़की यूनिवर्सिटी टॉप कर गयी। उसके एक क्लासमेट को उसकी मेरिट पर विश्वास नहीं हुआ तो पूछने लगा-मैं तुझे टॉपर तब मानूंगा जब तू मेरे एक सवाल का तसल्लीबख्श जवाब देगी।