खाद्यान्न के आदेश की धज्जियां उड़ाते कोटेदार पर बन्द है कोटे की दुकान


 


 


प्रयागराज। प्रयागराज में अधिकांश कोटेदार आयुक्त खाद्यान्न के पत्रांक 1672 की खुली अवहेलना करते हुए जरूरतमंदों को राशन नही बांट रहे हैं तो तमाम कोटेदार मशीन मैपिंग के नाम पर आराम फरमा रहे है जबकि जरूरतमंद भोजन को तरस रहे हैं जानकारी के अनुसार आयुक्त खाद्यान्न ने उत्तर प्रदेश के सभी डीएम, एसपी, एसएसपी, डीएसओ के नाम जारी अपने पत्रांक 1672 दिनांकित 30 मार्च 2020 द्वारा स्पष्ट किया है कि 01 अप्रैल 2020 से खाद्यान्न का वितरण कोटेदारों द्वारा किया जाना है जिसके लिए सुबह 06 से रात्रि 09 बजे तक मशीन संचालित रहेगी एवं सभी अंत्योदय, मनरेगा, श्रम विभाग में पंजीकृत व नगर विकास विभाग में दिहाड़ी मजदूरों को 3 माह का निःशुल्क राशन व 01 किग्रा दाल शुष्क राशन दिया जाएगा। इसके अलावा कोटे की दुकान पर सैनिटाइजर, साबुन व पानी की व्यवस्था हाथ धोने के लिए होगी व सोशल डिस्टेंसिंग का अनुपालन किया जाएगा एवं एक बार मे 5 से अधिक लोग नही आ सकेंगे परन्तु प्रयागराज के नैनी स्थित काशीराम आवास के कोटेदार सहित अधिकांश कोटेदार मशीन मैपिंग का बहाना बनाकर राशन नही बांट रहे हैं व आराम फरमा रहे हैं। इस बाबत काशीराम के कोटेदार ने कल मशीन खराब होने का बहाना बताया जिसकी पुष्टि डीएसओ ने भी किया जबकि आज उक्त कोटेदार ने बात करने से इनकार कर दिया वहीं एआरओ जीतलाल ने बताया कि मशीन की मैपिंग होने के बाद कल राशन का वितरण होगा परन्तु समय बढ़ाने से उन्होंने इनकार कर दिया। ऐसे में यह प्रश्न लाजिमी है कि राष्ट्रीय आपदा के समय गरीब व मजबूर मजदूरों को राशन कैसे मिलेगा। उधर प्रयागराज के सोरांव तहसील अंतर्गत होलागढ़ ब्लॉक के जूडापुर बीहड़ के कोटेदार छेदी लाल पटेल के पुत्र रोजगार सेवक योगेश पटेल आज कोटा चलाते मिले परन्तु वह निःशुल्क के बजाय रु0 पचास प्रति कार्डधारक से हेतु वसूल रहे थे। इस संदर्भ में डीएसओ प्रयागराज से बात करने पर वह भी असहाय नजर आए। बड़ा सवाल यह है कि जब कोटेदार, एआरओ व डीएसओ जानबूझकर आंखें बंद किये हैं तो इस राष्ट्रीय आपदा के समय गरीब, मजबूर, मजदूरों की समस्या कौन दूर करेगा व क्या वह भोजन के लिए तरसने पर मजबूर होंगे।